Sesame Cultivation: तिल की खेती कर किसान होंगे मालामाल, कम लागत में ज्यादा मुनाफा, जाने इसकी उन्नत किस्मों में बारे में

Sesame Cultivation: तिल की खेती कर किसान होंगे मालामाल, कम लागत में ज्यादा मुनाफा, जाने इसकी उन्नत किस्मों में बारे में, तिल की खेती से किसान अच्छी खासी कमाई कर सकते है। अधिकतर किसान गेंहू और धान की खेती को परंपरागत खेती को करते है जिससे उनको मुनाफा कम होता है और आज हम आपको तिल की खेती को करने के बारे बताने जा रहे जिससे देश की बड़े पैमाने पर खाया तेलों का आयात किया जाता है।

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तिल की उन्नत किस्में –

तिल की उन्नत किस्में- आर.टी. 46, आर.टी. 125, आर.टी. 127, आर.टी. 346, आर.टी. 351 हैं. ये किस्में 78 से 85 दिनों में पक जाती हैं. और इससे 700 से 800 किलो प्रति हेक्टेयर बीज भी मिल सकए है। इसमें ऑयल की मात्रा 43 से 52 फीसदी तक होती है।

खेती की तैयारी –

तिल की खेती करने के लिए हमे अधिक खरपतवार वाली जमीन के लिए गर्मियों में एक गहरी जुताई जरूरकरना चाहिए और मानसून की पहली बारिश आते ही 1-2 बार खेत की जुताई करके जमीन तैयार कर लेंना चाहिए और ये कम से कम 3 वर्षों में एक बार 20-25 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर का भी प्रयोग कर सकते है।

तिल की खेती की बुआई –

तिल की खेती के लिए हमे प्रति हेक्टेयर 2 से 2.5 किग्रा बीज का प्रयोग किया जाता है। तिल की बुवाई मानसून की पहली बारिश के बाद जुलाई के पहले हफ्ते में 30से 45 सेमी कतार से कतार की दूरी और 10से 15 सेमी पौधे से पौध की दूरी पर की जाती है और बुबाई करने से पहले जीवाणु अंगमारी रोग से बचाने के लिए बीजों को 2 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का 10 लीटर पानी में घोल बनाकर 2 घंटे तक बीजोपचार करें और बीजों को छाया में सुखाकर ही बुवाई करें. तिल में कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यू.यू.एस 7.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज को उपचारित कर इसकी बुआई की जाती है।

तिल की खेती से होंगा लाभ –

तिल की खेती उन्नत विधियों द्वारा करने पर 700-800 किग्रा. उपज प्रति हैक्टेयर प्राप्त की जा सकती है। यदि तिल की कीमत 100 रूपये प्रति किलो रहती है तो प्रति हैक्टेयर लगभग 50-55 हजार रूपये इस खेती से कमाए जा सकते है। इस तरह किसान इस खेती से अच्छा खासा लाभ उठा सकते है।

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