Farming Of Potato: किसानों के लिए वरदान बनकर आई आलू की खेती, कम समय में तगड़ा मुनाफा, जाने खेती का सही तरीका

Farming Of Potato:- किसानों के लिए वरदान बनकर आई आलू की खेती, कम समय में तगड़ा मुनाफा, जाने खेती का सही तरीका, आलू साल के 12 महीनो में इस्तेमाल में आती है। आलू एक बहुत ही महत्वपूर्ण खाद्य फसल है जो पूरी दुनिया भर में उगाई जाती है। भारत में भी यह एक प्रमुख सब्जी है। आलू की खेती के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जो आपको बताते है।

आलू की खेती के लिए जलवायु कैसी चाहिए?

आलू के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। आलू की खेती के लिए 15-25 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श माना जाता है।

आलू की खेती मिट्टी कैसी चाहिए?

आलू की खेती करने के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5-6.5 होना आवश्यक है।

आलू की खेती का समय

आलू की खेती साल में दो बार होती है। अगेती फसल की सितंबर-अक्टूबर में बुवाई करते है। पछेती फसल की नवंबर-दिसंबर में बुवाई करते है।

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आलू की बुवाई की कैसी होती है?

आलू के बीजों को 30-40 CM. की दूरी पर और 10-15 CM की गहराई में बुआई करते है। बुवाई से पूर्व बीजों को 2-3 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख देना चाहिए।

आलू की खेती के लिए खाद और उर्वरक

आलू की अच्छी पैदावार के लिए खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल बहुत आवश्यक होता है। खेत में गोबर की खाद, नीम की खली और रासायनिक उर्वरक डालते है।

आलू की खेती की सिंचाई का समय

आलू को नियमित रूप से सिंचाई की करने की बहुत आवश्यकता होती है। आलू की सिंचाई का समय और मात्रा मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति पर निर्भर है।

आलू की खेती निराई-गुड़ाई कैसे होती है?

आलू के खेत में खरपतवारों को नियमित रूप से हटाना जरुरी है। निराई-गुड़ाई से मिट्टी में हवा का संचार होते रहता है और फसल की वृद्धि अच्छे से होती है।

आलू से कीट और रोग कैसे हटाए?

आलू पर बहुत प्रकार के कीट और रोगों का प्रकोप हो जाता है। इनसे आलू को बचाव के लिए कई उपाय करने होते है।

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कटाई कैसे होती है?

आलू की फसल लगभग 90-120 दिनों में तैयार होती है। कटाई का समय आलू की किस्म और मौसम की स्थिति पर निर्भर है।

आलू की उपज

आलू की औसत उपज लगभग 20-30 टन प्रति हेक्टेयर हो जाती है।

आलू की खेती से लाभ

आलू की खेती बहुत ही फायदेमंद व्यापार है। इस फसल को तैयार होने में कम समय लगता है। आलू अच्छी पैदावार देती है। आलू की मार्केट में हमेशा डिमांड बनी रहती है।

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